नई दिल्ली ललित गेट और व्यापम पर विपक्षी दलों के भारी हंगामे की वजह से संसद में लगातार दूसरे दिन कोई कामकाज नहीं हुआ। सरकार कहती रही कि वह चर्चा के लिए तैयार है लेकिन कांग्रेस समेत विपक्षी दल इस मांग पर अड़े रहे कि जब तक विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व वसुंधरा राजे के इस्तीफे नहीं होते वे सदन नहीं चलने देंगे। सरकार ने साफ किया कि किसी का इस्तीफा नहीं लिया जाएगा। हंगामे के बीच दो बजे दोनों सदनों की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित हो गई। दो बार के स्थगन के बाद लोकसभा की बैठक दोपहर दो बजे शुरू होने पर भी विपक्ष का हंगामा जारी रहा। उपाध्यक्ष एम थंबीदुरै ने सदस्यों से नियम 377 के तहत अपने विशेष उल्लेख सदन के पटल पर पेश करने को कहा और इसके तुरंत बाद कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियां, आरजेडी और टीआरएस के सदस्य अपनी अपनी मांगों को लेकर आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। सदन में व्यवस्था बनते नहीं देख उपाध्यक्ष ने कुछ ही मिनट में कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले सदन में विपक्ष के अभूतपूर्व हंगामे के बाद लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने हंगामा कर रहे सदस्यों कों चेतावनी दी कि सदन में तख्तियां दिखाने और काले झंडे लहराने वाले सदस्यों को अनुशासनात्मक कार्रवाई झेलनी पड़ेगी। इसके बाद विपक्ष का गुस्सा और भड़क गया तथा जबरदस्त हंगामे के बाद कार्यवाही दो बजे तक के लिये स्थगित कर दी गई थी। राज्य सभा में कार्यवाही शुरू होने पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, 'अगर विपक्ष नियमों में बदलाव कर राज्य के मुद्दों पर चर्चा चाहता है, तो हम तैयार हैं। हम सभी राज्यों के मुद्दे उठाएंगे, जो कुछ केरल, हिमाचल प्रदेश, असम और गोवा में हो रहा है, सभी पर चर्चा की जाएगी।' हंगामा को देखते हुए सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर बीएसपी नेता मायावती ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर ललित मोदी की मदद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र इन दोनों ही महिलाओं पर कार्रवाई को तैयार नहीं है। बीएसपी प्रमुख ने कहा कि व्यापम राज्य का विषय नहीं है, यह राष्ट्रीय मुद्दा है। जेटली ने राज्य के मसले पर फिर सदन की नियमावली का हवाला दिया। सीपीएम के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि व्यापम घोटाले में लोगों की मौत मध्य प्रदेश से बाहर हुई, इसलिए यह राज्य का विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि संसद का काम सरकार को जवाबदेह बनाना है। जब तक जांच के आदेश नहीं दिए जाते और संबंधित लोग इस्तीफा नहीं देते, चर्चा नहीं हो सकती। इसके बाद जेटली ने सवाल किया कि सुषमा ने कौन-सा कानून तोड़ा है, जिसमें जांच होनी चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा, 'क्या मैं पूछ सकता हूं कि विदेश मंत्री ने किस कानून का उल्लंघन किया है, जिसमें जांच के आदेश दिए जा सकते हैं?' हंगामा जारी रहते देख उपसभापति पी.जे. कुरियन ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। प्रश्नकाल के लिए सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी यह दृश्य बरकरार रहा, जिसके कारण सभापति एम.हामिद अंसारी ने कार्यवाही अगले आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर जनता दल (यूनाइटेड) के नेता शरद यादव ने कहा कि यह एक परंपरा है कि अगर ऐसे आरोप लगाए जाते हैं तो संबंधित मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'यह एक परंपरा रही है। जब आडवाणीजी और मेरा नाम हवाला कांड में आया था, हमने इस्तीफा दिया था। हमने यह भी स्पष्ट किया था कि जब तक हम मामले में बरी नहीं हो जाते, सदन में नहीं आएंगे। हम इस्तीफे से मजबूत बनेंगे।'

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