दादा की दहाड़ सुन कांपते थे अधिकारी

जागरण,पाकुड़:जायजुगलगित्एबगियाक्बुनासाइमनदादा।आबोरेनअयुरिच्एताहेकानासुख-दुखरेयगोड़ोक्कानताहेनानितोक्आबोतालारेबनुया।उनीयाक्दिसागोटादिनताहेना(साइमनदादाहमलोगोंकेअभिभावकथे।सुख-दुखमेंसाथदेतेथे।अबवहहमारेबीचनहींहैं।उनकीयादहमेशाआएगी)।यहकहतेहुएबिलखपड़ीडुमरियागांवकीआदिवासीमहिलाएं।गांवकीमहिलाओंकोयहविश्वासहीनहींहोरहाथाकिसाइमनदादाअबहमेशाकेलिएइससंसारकोअलविदाकहगए।महिलाओंकेचीत्कारसेपूरेगांवमेंमातमपसरगया।हरकिसीकेआंखमेंआंसूथी।

गांवकीमिलीसेंटहांसदा,रानीहांसदा,मतीहांसदा,लीलमुनीहांसदा,संझलीहांसदाआदिमहिलाओंकेआंसूरूकनहींरहीथी।चहुंओरगमगीनमाहौलथा।करीबदोबजेसाइमनदादाकोदफनादियागया।इसकेबादसभीआंखोंमेंआंसूभरकरअपने-अपनेघरकीओररवानाहोगए।रानीनेबतायाकिजबदादाविधायकहुआकरतेथेतोइलाकेमेंदहाड़तेथे।उनकीदहाड़सुनकरअधिकारीथर-थरकांपतेथे।प्रत्येकपर्व-त्योहारमेंगांवआकरलोगोंसेमिलजुलकरसुख-दुखबांटतेथे।लीलमुनीकहतीहैकिसाइमनदादाहमलोगोंकेलिएभगवानथे।किसीभीमुसीबतमेंपहुंचजातेथे।हमलोगोंनेअपनाअभिभावकखोदिया।अबउनकीआवाजकभीभीसुनाईनहींदेगी।

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