होलिका दहन नहीं, यहां हवन-पूजन के बाद शुरू होती होली

श्रावस्ती:होलीयानीउत्साह,उल्लासऔरउमंगकापर्व।वैसेतोपूरेदेशमेंहोलिकादहनकेबादहोलीखेलीजातीहै,परगिलौलाब्लाकक्षेत्रकेग्रामपंचायतसुविखाकेहोलीकेरंगअलगहैं।यहांलगभगतीनदशकसेहोलिकादहननहींहोताहैं।प्रदूषणसेबचाववसौहार्दबनाएरखनेकेलिएयहांकेलोगयज्ञ-हवनकेबादरंगखेलतेहैं।

होलीकेत्योहारपरउड़तगुलाललालभएबदरा.केसाथप्रेमकेरंगमेंडूबकरगांवकेलोगोंकातन-मनअबीरहोजाताहै,लेकिनहोलिकानहींजलाईजातीहै।यहपरंपरालगभग30वर्षोंसेचलीआरहीहै।इसकाकारणकोईटोना-टोटकानहींहै,बल्किगांवमेंआपसीभाईचारावसौहार्दबनाएरखनेकेलिएपहलहुईथी।गांवकेयुवाओंनेभीइसपरंपराकोसंभालरखाहै।होलीकेदिनहोलिकादहनस्थलपरपहुंचकरगांवकेलोगहवनकरतेहैं।प्रसादवितरणकेसाथलोगोंकोअबीर-गुलाललगाकरहोलीशुरूकरतेहैं।इसकेबादपूरेउल्लासकेसाथहोलीकाकार्यक्रमचलताहै।ग्रामप्रधानउमेशकुमारमिश्रकाकहनाहैकिहमारेग्रामपंचायतमेंहोलिकादहननहींहोताहै।लोगपूजा-पाठकेसाथआपसमेंमिलजुलकरपूरेउल्लाससेत्योहारमनातेहैं।वृद्धमुन्नाराममिश्रनेबतायाकिहमारेसभीत्योहारपूजा-पाठसेशुरूहोतेहैं।सनातनीपरंपराहैकिकोईभीशुभकार्यदेवी-देवताकेपूजा-पाठसेशुरूहोनाचाहिए।गांवकेलोगहवन-पूजनकेबादहोलीसेरंगमेंसराबोरहोजातेहैं।रामराखनत्रिपाठीकाकहनाहैकिहोलीनजलाएजानेकीपरंपरादशकोंसेचलीआरहीहै।लोगइसेबेहतरमानरहेहैं।आपसमेंमिलकरबड़ेउल्लाससेहोलीमनाईजातीहै।

फगुआगीतोंपरखूबहोतीमस्ती

गांवकेओमप्रकाशशुक्लनेबतायाकिहोलिकादहनकीरातमेंगांवकेलोगएकस्थानपरएकत्रहोतेहैं।यहांदेरराततकफगुआगीतोंपरजमकरमस्तीहोतीहै।इसदौरानअमनऔरभाईचाराबनारहेइसकापूराध्यानरखाजाताहै।

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