कोरोना के कहर में सुहाना लगने लगा गांव

जमुई।कोरोनासंक्रमणसेबचावकोलेकरदेशमेंलागूलॉकडाउनमेंजबकामगारोंकीनौकरीछूटीतोसबकोगांवकीयादसतानेलगी।कामगारहीनहींपढ़ेलिखेछात्रनौजवानोंकेलिएभीघरवापसीएकमात्रविकल्पबनगया।लगातारकामगारोंकीघरवापसीसेकोरोनासंक्रमणकेबढ़तेखतरेकेबीचग्रामीणइलाकेमेंचहलपहलबढ़गईहै।

शहरोंकोनजीरमाननेवालेइनकामगारोंकोगांवकीमिट्टीकीखुशबूसुहानीलगनेलगीहै।ग्रामीणइलाकोंमेंबाहरसेआएप्रवासीकामगारखेतीबारीसहितअन्यकार्यमेंअपनासमयव्यतीतकररहेहैं।इसतरहलॉकडाउनकेबीचखेतीकिसानीसेगांवकीजीवनशैलीपटरीपरलौटपड़ीहै।बाहरजाकरमजदूरीकरनेवालेलोगअपनेघरवखेतकेकाममेंपूरीतरहरमगएहैं।सुबह-शामखेतोंमेंजाकरअपनीफसलोंकीदेखभालकररहेहैं।

खेतीबारीसेस्वरोजगारकीतरफबढ़ारुझान

रोजीरोटीकीतलाशमेंगांवछोड़शहरकीओरगएप्रवासीयुवावर्गोंकीलॉकडाउनमेंबेरोजगारीकेबीचजीविकोपार्जनकीजद्दोजहदमेंगांवकीखेतीबारीसेरोजगारऔरस्वरोजगारकीतरफरूझानबढ़गयाहै।युवावर्गकिसानीसंगखेतीबारीकीओरअपनाकदमबढ़ायातोसहसाउन्हेंअपनागांवप्यारालगनेलगाहै।उन्हेंअबअपनीमिट्टीकीखुशबूकामहत्वसमझमेंआनेलगाहै।बड़े-बुजुर्गउन्हेंघरपरहीरहकरखेती-किसानीसेआर्थिकउपार्जनकेतौरतरीकोंसेअवगतकरारहेहैं।कुमारगांवकेप्रगतिशीलकिसानसहपूर्वमुखियाहरदेवसिंहबतातेहैंकिउनकेजीवनमेंऐसीसमस्याकभीनहींआई।बतातेहैंकिकोरोनानेसभीकोनएतरीकेसेजीनेकासबकसिखादियाहै।कोरोनानेलोगोंकोअपनीमाटीसेजोड़दियाहै।हालांकि,घरलौटनेपरएकसाथपरिवारोंकेमिलनसेबड़े-बुजुर्गोंकोएकअलगखुशीमिलीहै।बहरहाल,संकटकीइसघड़ीमेंगांवकाप्रेमऔरभाईचाराशहरकेलोगोंकेलिएनजीरहै।

हंसी-खुशीसेबीतनेलगाहैसमय

गांवआएलोगोंकासमयहंसी-खुशीसेबीतरहाहै।बच्चोंकीपढ़ाईलगभगबंदहैतोवेदादा-दादीकेपाससमयबितानेमेंमशगूलहोगएहैं।लोगोंकाएकसाथघरआंगनमेंबैठगपशपकरनेसेघर-घरकामाहौलखुशनुमाहोगयाहै।परिवारकेलोगएक-दूसरेकासहयोगकरनेमेंजुटगएहैं।किसानशंकरसिंहबतातेहैंकिशहरीचकाचौंधसेगांवहरस्तरपरअच्छाहै।शहरमेंजाकरदिन-रातपसीनाबहानेवालेअगरघरपरहीरहकरमेहनतकरेंतोखुदकेसाथ-साथगांवमेंखुशहालीलासकतेहैं।युवाशशांककुमारसिंहकहतेहैंकिलॉकडाउनमेंखेतीकीतस्वीरबदलगईहै।स्वरोजगारकीतलाशमेंयुवाओंकारूझानबढ़ाहैतोखेतीकोबढ़ावादेतेहुएव्यापारकारूपदेरहेहैं।सरकारअगरगांवकीतरफध्यानदेनाशुरूकरेतोकिसीभीसंकटमेंऐसीनौबतनहींआएगी।खेती,किसानीमेंस्वरोजगारकेकईअवसरहैंजिसेतराशनेकीजरूरतहै।

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