पहाड़ के इस गांव में निमंत्रण देने की है अनोखी परंपरा, सुहागिन महिलाएं घर-घर जाकर बनाती हैं स्‍वास्तिक का चिन्‍ह

गरुड़(पिथौरागढ़)चंद्रशेखरबड़सीला:जहांआजआधुनिकताऔरबाजारकीअंधीदौड़मेंसंस्कारखत्महोतेजारहेहैं,वहींपहाड़केकुछगांवऐसेहैंजोआजभीपरंपराओंवछीजतेसंस्कारोंकोबचानेमेंलगेहुएहैं।पिथौरागढ़काऐसाहीएकगांवहै-भेटा।जहांसुहागिनमहिलाएंशादीवअन्यशुभकार्योंपरअपनेपारंपरिकपरिधानोंमेंसज-धजकरअपनेसगेसंबंधियोंवग्रामीणोंकोआमंत्रणदेनेजातीहैं।जिनलोगोंकोवेआमंत्रितकरनेजातीहैउनकेघरोंपरस्‍वास्तिककाचिंहबनातीहैं।वर्षोंसेचलीआरहीयहपरंपराआजभीजीवंतहै।

पारंपरिकपरिधानमेंपिछौड़ाओढ़करघर-घरजातीहैंसुहागिनमहिलाएं

पिथौरागढ़जिलेकेतहसीलगरुड़केगरुड़-कौसानीमार्गपरस्थितभेटागांवमेंआधुनिकताकेइसदौरमेंभीनिमंत्रणदेनेकीअनूठीपरंपराहै।यहांनिमंत्रणकार्डोंकेमाध्यमसेनहींदियाजाताहै,बल्किघर-घरजाकरसंस्कारोंकेसाथदियाजाताहै।गांवकेनवनिर्वाचितग्रामप्रधानकृपालदत्तलोहुमीबतातेहैंकिभेटागांवमेंशादीयाअन्यशुभकार्योंपरनिमंत्रणदेनेसुहागिनमहिलाएंजातीहैं।दोसुहागिनमहिलाएंपिछौड़ाओढ़करकुमाऊंनीपरिधानोंमेंसज-धजकरटीकाकीथालीवनारियललेकरघर-घरजातीहैंऔरप्रत्येकपरिवारकेमुख्यदरवाजेपरस्वास्तिककाचिह्नबनातीहैं।उसकेबादउसपरिवारकोनिमंत्रणदियाजाताहै।गांवकीविशेषतायहभीहैकियहांकेवलएकहीजाति(लोहुमी)केलोगरहतेहैं।संस्कारोंकीआकर्षकबानगीआजभीभेटागांवमेंदेखनेकोमिलतीहै।

कत्यूरीशासनकालसेहीचलीआरहीयहपरंपरा

कत्यूरघाटीमेंसातवीं-आठवींशताब्दीसेकत्यूरीशासनप्रारंभहुआ।भेटागांवमेंयहपरंपराकत्यूरीशासनकालसेहीचलीआरहीहै।भेटाकेलोहुमीपरिवारमांकोटभ्रामरीकेउपासकहैं।उन्हेंभेटागांवभीकत्‍यूरवंशकेराजाओंनेहीभेंटमेंदिया।बुजुर्गबतातेहैंकिउससमयराजाओंकास्वागतसत्कारइसीप्रकारहोताहोगा,जिसनेसमयकेसाथएकपरंपराकास्थानलेलिया।

घरआकरदेखाजाताहैस्वास्तिककाचिह्न

भेटागांवमेंजबमहिलाएंनिमंत्रणदेनेजातीहैंतोसबसेपहलेस्वास्तिककाचिह्नबनातीहैं।यदिकोईपरिवारउससमयघरमेंनहींहोताहै,तोउसकेघरकेदरवाजेपरभीस्वास्तिककाचिह्नबनायाजाताहै।निमंत्रणपड़ोसीकोदियाजाताहै।घरलौटनेपरवहपरिवारसबसेपहलेस्वास्तिककेचिह्नकोहीदेखताहै।इससेनिमंत्रणकीपुष्टिभीहोजातीहै।भेटाकाएकलोहुमीपरिवारदोकिमीदूरलोहारीमेंरहताहै।महिलाएंदोकिमीदूरजाकरभीइसीपरंपरासेनिमंत्रणदेतीहैं।

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