प्रवासी मजदूरों को गांव में नहीं मिली सुविधा, खाने-पीने के लाले

जेएनएन,दहगवां(बदायूं):लॉकडाउनकेबादसेतमामप्रवासीमजदूरकहींपैदलतोकहींसाइकिलसेचलकरआरहेहैं,लेकिनउनकोसुरक्षितस्थानयाउनकेघरोंतकपहुंचानेमेंनाकामीहीमिलरहीहै।दर-दरकीठोकरेंखातेहुएकिसीतरहअपनेघरोंतकपहुंचरहेहैं।प्रवासीमजदूरग्रामप्रधाननेउनकीजांचकेलिएस्वास्थ्यविभागसेलेकरतहसीलप्रशासनकोसूचनादेदीथी,लेकिनकोटेदारद्वाराउनकीसहायतानहींहोसकी।

विकासखंडदहगवांकेगांवदियोहराशेखपुरकेमजरासूरतनगलाकेमिहीलालनेबतायाकिवहउत्तराखंडनैनीतालमेंनदीमेंपत्थरतोड़नेकाकार्यकरताथा।उसकेअलावाबहुतसेमजदूरऔरभीथेजोअन्यजगहोंसेआएहुएथे।लॉकडाउनकेचलतेजबतकजेबमेंपैसेथेतबतकसबकुछठीकठाकचलतारहा।पैसेखत्महोतेहीखानेपीनेकासंकटगहरानेलगा।किसीतरहपरिचितोंसेचावलउधारलेकर15दिनकासमयऔरबीतगया।फिरसबतरफसेरास्ताबंददिखातोघरवापसआनेकीठानी,लेकिनकोईसाधननहोनेसेपैदलहीघरकोनिकलपड़ा।तीनदिनवतीनरातलगातारचलनेकेबादआखिरअबसेचारदिनपूर्ववहअपनेघरआहीगया।लाचारहालतमेंउसेगांवपहुंचनेपररास्तेमेंकईजगहपरेशानियोंकासामनाकरनापड़ा,लेकिनअबस्वास्थ्यविभागकीओरसेकोईजांचनहींहोसकीहै।इसकेअलावागांवकेहीकल्लूवउसकीपत्नीदिल्लीमेंमजदूरीकरभरणपोषणकररहेथे।जिन्हेंजांचकेबादट्रेनसेबरेलीभेजागयाथा,लेकिनबरेलीकेबाददहगवांतकआनेमेंभारीपरेशानीउठातेहुएट्रकद्वाराआसके।फिलहालजितनेप्रवासीमजदूरबाहरसेआएहैंउनकोप्रशासनकीओरसेकोईसुविधानहींमिलसकीहै।गांवमेंहीमजदूरीकरजीवनयापनकरनेकोमजबूरहैं,लेकिनसबसेबड़ीलापरवाहीस्वास्थ्यविभागकीनजरआरहीहैकिचारदिनबीतजानेकेबादभीअभीतकप्रवासीमजदूरोंकीजांचतकनहींहोसकीहै।

सभीप्रवासीमजदूरोंकीजानकारीहमनेस्वास्थयविभागकेकर्मचारियोंकोदेदीहै।इसकेअलावालेखपालकोभीबतादियागयाहै।

-ग्रामप्रधानदियोहराशेखपुर,मक्खनलाल

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