पत्नी दिव्यांग तो पति लाचार, गांव में ढूंढ़ रहे रोजगार

संवादसूत्र,महेबा:कोरोनासंकटमेंदिव्यांगपत्नीवदोबच्चोंकेसाथआगरासेपालगांवलौटेश्रीकृष्णपरदोहरीमारपड़ी।जिसघरमेंछांवमिलनेकीआसलेकरआएवहगिरगयाथा।अबझोपड़ीडालकरगुजर-बसरकररहेहैं,दूसरीओररोजगारनहींमिलनेसेउन्हेंपरिवारकीचिंतासतारहीहै।इनहालातोंमेंआंखेंजरूरनमहैंलेकिनकहतेहैंकिअबलौटनाकिसीकीमतपरनहींहै।बसयहींरोजगारमिलजाए,इसीजुगतमेंलगेहैं।

पालगांवनिवासीश्रीकृष्णकहतेहैंकिखेती-बाड़ीइतनीनहींथीकिगांवमेंगुजाराहोसके।इसीलिए25सालपहलेजीवनयापनकेलिएदिव्यांगपत्नीपुष्पाऔरदोबच्चों10वर्षीयरामहेतऔरआठवर्षीयराजकोलेकरआगराचलेगएथे।वहांऑटोचलाकरभरणपोषणकरतेथे।18मईतकलॉकडाउनखुलनेकाइंतजारकियाफिरगांवलौटआए।अर्सेबादगांवलौटेतोघरबारिशऔरधूपसेधराशायीहोगया।पेड़-पौधोंकेबीचकेवलमलबामिला।बतायाकिपत्नीपुष्पाहाथोंसेदिव्यांगहै।ऑटोरिक्शाचलातेसमयमेराभीपैरटूटचुकाहै।भारीकामनहींकरसकतेहैं।बच्चोंकेसाथबारिशमेंकैसेजिदगीकटेगी,यहसमझमेंनहींआरहाहै।ग्रामप्रधानने15किलोराशन,पांचकिलोआलूवनमकदिया,जिससेपरिवारगुजर-बसरकररहाहै।मगर,आगेकैसेपेटभरेंगेइसकीचिताखाएजारहीहै।ग्रामप्रधानसोबरनकाकहनाहैकिसरकारीयोजनाकेजरिएऋणदिलाकरस्वरोजगारकरायाजाएगा।चूंकिदंपतीमेहनतकाकार्यकरनहींसकतेहैंइसलिएमनरेगामेंकामनहींदियाजासकताहै।

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