ठाढी में आयोजित नवाह संकीर्तन श्रद्धा के माहौल में संपन्न

मधुबनी।अंधराठाढीप्रखंडकेठाढीगांवस्थितब्रह्मस्थानपरआयोजितनवाहसंकीर्तनधूमधामसेसंपन्नहोगया।नौदिनोतकपूरागांवईश्वरकीअराधनाऔरभक्तिमेंडूबारहा।गौरतलबहैकिपिछले87सालोंसेयहांअनवरतविशेषनवाहसंकीर्तनयज्ञ,कुमारीभोजन,महादेवपूजनऔरहवनआदिहोताआरहाहै।प्रत्येकसालमाघएकादशीसेयहांनगरकीर्तनप्रारंभहोताहैजोफाल्गुनएकादशीकोब्रह्मस्थानमेंनवाहसंकीर्तनमेंबदलजाताहै।ठाढीगांवकेदक्षिणीक्षितिजपरस्थितमांपरमेश्वरीकाअलौकिकमंदिरऔरउत्तरीक्षितिजकेनरहीतालाबपरस्थितमहात्मानंदेश्वरजीकीमनोरमपर्णकुटीआजभीगांवकेआस्थाऔरविश्वासकाप्रमुखकेन्द्रबनाहुआहै।ऐसीमान्यताहैकीमिथिलाचंलमेंनवाहसंकीर्तनकाआरंभयहीसेहुआहै।इससेपहलेमिथिलाचंलमेंत्रिरात्रीयासाप्ताहिककीर्तनहीप्रचलितथा।1934मेआएभयंकरभूकंपकेबादजबजनसमुदायडरऔरआतंककेवातावरणमेंजीरहाथा,तबमहात्मानंदेश्वरनेयहांपहलीबारनवाहकीर्तनकाआयोजनकरजनमानसकेअंदरव्याप्तडरऔरभयकोखत्मकरनेकाकामकियाथा।कालांतरमेब्रह्मस्थानपरआयोजितयेनवाहसंकीर्तनसाहित्यऔरआध्यात्मिकआस्थाकाकेन्द्रबनगया।महात्मानंदेश्वरकेपरलोकगमनकेबादपं.सुशीलझानेइसइसपरंपराकोआगेबढ़ानेमेंविशेषभूमिकाअदाकी।आधुनिकताकीनईहवाकेविपरितठाढीकेयुवाअपनीप्राचीनऔरगौरवशालीसंस्कृतिकोबचानेमेजीजानसेजुटेहैं।इसनवाहसंकीर्तनकोसफलबनानेमेंपूरेगांवकेहरसमुदायकेलोगोंनेभीअपनीभागीदारीदी।

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